DUSU चुनाव नतीजों पर कुछ आज़ाद विचार
साल के 365 दिन छात्रहित के कार्यक्रम चलानेवाला संघटन, ABVP जब छात्र चुनाव लड़ता है, तब अपने काम को आगे रखता है और एक एक कार्यकर्ता से बने संघटन का उपयोग करता है। कार्यकर्ता भी निस्वार्थ भाव से चुनाव में कड़ी मेहनत करते है। हर चुनाव जीतने के लिए लढ़ा जाता है, मगर अन्य राजनीतिक दलोकी छात्र इकाई के द्वारा साम दाम दंड भेद से चुनाव जीतना ABVP जैसे सिद्धांतवादी संघटन स्वीकार नही कर सकता। न ही २ सीटों से हुई हार से सालभर चलनेवाली गतिविधियों पर कुछ असर पड़ेगा, क्योंकि सिर्फ चुनाव लड़ना और जीतना ABVP का एक मात्र एजेंडा नही है। चुनाव तो १-२ सप्ताह की गतिविधि है, जिसका प्रयोग ABVP, छात्र समस्योंको उजागर करनेमें, अपनी विचारोंका प्रसार करनेमें और नए विद्यार्थियोंको संघटनमें लाने के लिए करती है। यह बात मीडिया और ABVP की जानकारी रखने वाले लोगोका समझना मुश्किल है। वह राजनीतिक दलोकी तरह छात्रसंघ चुनाव को भी छात्र संघटन की ताकत परखनेका एक मात्र माध्यम समझते है। छात्रों का समर्थन किस संघटन को है इसका अंदाज हम इन चुनावोसे लगा सकते है। पर इसके साथ ही कौनसा संघटन स्वयंम को छात्रोंके सामने प्रभावी रूपसे रखता ह...