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Showing posts from April, 2016

स्वतंत्रता संघर्ष

स्वतंत्रता संघर्ष इस कविता में एक देशभक्त नवयुवक ने भारत के आज़ादी के वक्त अपनी भावनाए व्यक्त की हैं| "स्वतंत्रता संघर्ष" कौन कहता हैं सब समाप्त हो गया, अभी तो एक शुरुआत हैं | २५० सालों के संघर्ष के बाद, पूर्व में नया सूरज उग रहा है | अंग्रेजों के उस विश्वास को, हमें पूरी तरह तोड़ना हैं | और संपूर्ण भारत को, एक माला में जोड़ना हैं | मुसीबते तो बहुत आएँगी आगे, संघर्ष करते चलना हैं | अपनी अबंधित तरक्की से, पूरी दुनिया को हिलाना हैं | तरक्की की राह में, एक बात हमें भूलनी नहीं | परायों से जाने के बाद, अपनोंसे परायों जैसे व्यवहार करना नहीं | अब कोई गरीब नहीं रहेगा, अब कोई भूक से नहीं मरेगा | आज़ाद भारत की इस भूमि पर, हर भारतीय घर संपन्न रहेगा | - भारतीय आनंद

क्रांति फिर आएगी (Kranti Fir Aayengi)

हवा में उड़कर, लहरों पर तेरकर, आग में जलकर, क्रांति फिर आएगी| डंके के चोट पर, सरकार के नोक पर, करोड़ों के हाथों से, क्रांति फिर आएगी । लोगों की फुंकर से, लहराती हुई तलवार से, शहीदों के ललकार से, क्रांति फिर आएगी । लाखों सो रहे थे, देश की हालत पर रो रहे थे, सबकी नींद खुल जाएँगी, क्रांति फिर आएगी | चाहे तुम साथ हो, या हमारे खिलाफ हो, मेरे देशी के लिए, क्रांति फिर आएगी | वो दिन दूर नहीं , जब भारतमाता अपने सपोतों को एक पायेगी, इस पावन वर्ष  में, क्रांति जरूर आएगी। - Anand Purohit, 2011

होय ABVP आंबेडकरवादीच!

'सुरुवातीपासून शेवटपर्यंत मी भारतीयच' या भीमाच्या वचनावर चालणारी संघटना! होय ABVP आंबेडकरवादीच! 1952 च्या निवडणुकीत 'मत बाद करा पण भीमाला मत देऊ नका' असं म्हणाऱ्या डाव्यांना उघडे पाडणारी संघटना! होय ABVP आंबेडकरवादीच! भीमाने लिहिलेल्या संविधानला न मानणाऱ्या नक्षलवाद्यांना शिंगावर घेणारी संघटना! होय ABVP आंबेडकरवादीच! 1975 मध्ये भीमाने दिलेल्या अधिकारांवर आली गदा तेव्हा देशभर चळवळ उभी करणारी संघटना! होय ABVP आंबेडकरवादीच! मराठवाड़ा विद्यापीठाचे नामांतर व्हावे यासाठी विधानसभेत घुसून आंदोलन करणारी, महाराष्ट्रभर रान पेटवणारी संघटना! होय ABVP आंबेडकरवादीच! संविधानने स्थापन केलेल्या न्यायालयाला व गुन्हेगारांना दिलेल्या फाशीच्या शिक्षेला न मानणाऱ्या डाव्यांच्या विरोधात उभी ठाकणारी संघटना! होय ABVP आंबेडकरवादीच! संसदेवर हल्ला करणाऱ्या अफजलच्या समर्थकांविरुद्ध JNU मध्ये लढणारी संघटना! होय ABVP आंबेडकरवादीच! ना मनुस्मृती ना त्याची वृत्ती फ़क्त भीमाने लिहिलेली भीमस्मृति म्हणजेच आपले संविधान मानणारी संघटना! होय ABVP आंबेडकरवादीच! जातीमुक्तिचे भीमाचे स्वप्न जा...

अब कोई नहीं बिस्मिल यहाँ

गोलियोंके गुंज में भी, सुनते थे हम कहानियाँ। चलते निकले पश्चिमकी ओर, उत्तरकी तरफ करदी रवानिया। वा रे कवियोंकी कल्पनामें, जाकर तू कब फँस गया। क्यों तू बिस्मिल के शोकमें, जब प्रेम गीतोमें समा सज गया। आज पूछें वो आझाद हमसे, रामप्रसाद कहाँ खो गया। खून जो मिट्टीमें मिला था, आज की नसलोमें क्यों सो गया। साथी हमसे तुम खफा होते, देशसे क्यों तू रूठ गया। खून के आँसू बहाते फिरसे, बिस्मिल कब्रमें जाकर सो गया। सोचूँ अलविदा का ख़त लिखकर, मैं भी छोड़दूँ ये जहाँ, क्योंकि दिन के अँधेरे मैं ढूँढू, फिरभी अब कोई नहीं बिस्मिल यहाँ। - भारतीय आनंद