अब कोई नहीं बिस्मिल यहाँ

गोलियोंके गुंज में भी,
सुनते थे हम कहानियाँ।
चलते निकले पश्चिमकी ओर,
उत्तरकी तरफ करदी रवानिया।

वा रे कवियोंकी कल्पनामें,
जाकर तू कब फँस गया।
क्यों तू बिस्मिल के शोकमें,
जब प्रेम गीतोमें समा सज गया।

आज पूछें वो आझाद हमसे,
रामप्रसाद कहाँ खो गया।
खून जो मिट्टीमें मिला था,
आज की नसलोमें क्यों सो गया।

साथी हमसे तुम खफा होते,
देशसे क्यों तू रूठ गया।
खून के आँसू बहाते फिरसे,
बिस्मिल कब्रमें जाकर सो गया।

सोचूँ अलविदा का ख़त लिखकर,
मैं भी छोड़दूँ ये जहाँ,
क्योंकि दिन के अँधेरे मैं ढूँढू,
फिरभी अब कोई नहीं बिस्मिल यहाँ।
- भारतीय आनंद

Comments

Popular posts from this blog

The Days as Student Activist - The Days I Remember Each Day

Remembering martyred ABVP Activist Krishnavardhan Reddy, who was murdered by Maoists at Osmania University

भीमगीत - भीमा तुज्या स्वप्नासाठी ABVP आली रं