क्रांति फिर आएगी (Kranti Fir Aayengi)

हवा में उड़कर,
लहरों पर तेरकर,
आग में जलकर,
क्रांति फिर आएगी|

डंके के चोट पर,
सरकार के नोक पर,
करोड़ों के हाथों से,
क्रांति फिर आएगी ।

लोगों की फुंकर से,
लहराती हुई तलवार से,
शहीदों के ललकार से,
क्रांति फिर आएगी ।

लाखों सो रहे थे,
देश की हालत पर रो रहे थे,
सबकी नींद खुल जाएँगी,
क्रांति फिर आएगी |

चाहे तुम साथ हो,
या हमारे खिलाफ हो,
मेरे देशी के लिए,
क्रांति फिर आएगी |

वो दिन दूर नहीं ,
जब भारतमाता अपने सपोतों
को एक पायेगी,
इस पावन वर्ष  में,
क्रांति जरूर आएगी।
- Anand Purohit, 2011

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